वो काली रात,,,
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avinashthakur
avinashthakur Community member
Autoplay OFF   •   5 days ago
रात काली

वो काली रात,,,

पता है, बहोत सी काली रातों को सवेरा होते देखा है मैंने, दिन ढलती दोपहर को अंधेरा होते देखा है मैंने, जिस कदर धीरे धीरे अंधेरा छाता है, दिल को एक सुकून सा आता है, अब दिन अच्छा नहीं लगता मुझे, अब तो रात से प्यार है मुझे, क्यूँकी अंधेरे मे खुद की परछाईं भी छोड़ जाते है, ख़ुद के आँसू पोछना भी आसान हो जाते है, जो मैं छुपाना चाहता रहा हूँ, मेरे कुछ रिसते मैं खुद से तबाह करता जा रहा हुँ, अब तो दिल भर पड़ा है, कुछ सोचे बिना रो पड़ा है,

इस रोने का कोई वजह नज़र नहीं है, क्या करूँ कुछ समझ नहीं है, दिल भर कर उमड़ रहा है, आँखों से आंसू छलकने को तरस रहा है, अब तो आँसू भी मुझसे कहने लगा, "इतना पत्थर तू क्यूँ बन्ने लगा, हसरतें मर गई क्या तेरी, या तू ख़ुद को बदलने लगा, पत्थर को भी चोट लगे तो आवाज़ आती है, तू बिखरा पड़ा फ़िर भी तेरी पलकें नहीं झपकती है, याद रखना रिस्तों के बिना पल भर ना टिक पाएगा, रोये बिना तू चैन से सो नहीं पाएगा,"

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