अधूरी दास्तां तेरे साथ बिताए वो पल मेरी ज़िंदगी के सबसे हसीन पलो में से एक हैं....,सोचता हु क्या हैं जो खिंचता हैं तेरी ओर मुझे ओर हर वक्त एक बैचेनी सी की मानो बिजली सी पूरे बदन में दौड़ती हुई ना जाने कैसी अजीब सी सिहरन लिए वाक़ई बेहद अजीब ...,हा अजीब हैं..., सालो से साथ हैं मगर बाते हैं की थमने का नाम ही नहीं लेती...और जब भी साथ होता हु एक जाना माना सा एहसास हमेशा साथ होता हैं लगता है हमेशा से मेरे अंदर है मगर मिलता तभी हैं जब तुम मिलती हो ...जानता हु सोच रही हो कैसे लिखता हु तोड़ मरोड़ के ,सीधा सीधा कह कयू नहीं देता की......नहीं नहीं जरूरत नहीं अब इन सबकी ..जो मन हि मन में पा लिया हो अब उसे पाने की क्या कोशिश करु ....खैर छोड़ो तुम भी कितनी अजीब हो आधी नहीं पूरी पागल ..ओर अब बोलू भी तो क्या पागलपन तो तुम्ही से पाया है तभी ये लफ्ज़ रोके नहीं रुकते तुम्हारी तरह बिल्कुल तुम्हारी तरह ., जैसे हवा या क्या कहु पता नहीं ....हा पर बेशक ये पता था तुम भी कहा रुकने वाली थी कबसे जान रहा था हवा भी भला कभी रोके रुकी है किसी के..हा पर कभी ये हवा भी रुक जाया करती थी तुम्हारी ओर मेरी साँसों के करीब जब भी इन्हें पाया है वक्त जैसे थम सा गया हो ...क्या जादू था वो भी...., उस दिन जब इसी हवा को तुम्हारे जरिये महसूस किया ओर वो पहला एहसास मानो आज भी ज़िंदा हैं यही कही ,तुझमे या मझमे ..हा फरक है तो बस इतना की तुम बया करती हो होंठो से ओर में लफ़्ज़ों से बया करता हु ...अब समझ आया की क्यों ऐसे पल मेरे हिस्से में कम हैं..बहूत सोचा ....बहूत पर ये ख्याल आया भी तो कब जब सोचने का ना तो वक्त था ना इरादा तब समझ आया की कम है तभी तो नायाब हैं. अक्सर वहीं पल कीमती होते हैं जो किस्मत से युही मिल जाया करते है किसी नायाब हिरे की तरह ओर फिर मिलने का नाम ही नहीं लेते नायाब हो जाते है जेहेन में ....बहूत रात हो गयी हैं नींद आ नहीं रही तो सोचा कुछ लिख दु ...पर क्या ....जब तक तुम आ गयी तो तुम्हे ही लिख दिया....अरसा हो गया तुम्हे मिले देखे पर अब भी वो याद वो एहसास हर पल साथ है जादू है या शरारत समझ नहीं आता ...पर उसी दिन के इंतज़ार मे लिख रहा हु जब तुम हो साथ और कलम थाम के तुम्हें इस कागज़ पे उतार दु ..खैर सो जाता हु सुबह होने को आयी हैं... सेहत और सूरत दोनो का ध्यान रखता हु जानता हु जिस खूबसूरती से मेरी तरफ देखती हो उसे फीका नहीं करना चाहता....चलो अब ज़्यादा क्या बोलू फिर कभी दिल किया तो आजाऊँगा बया करने ये अधूरी दास्तां..........To be continued..........
अधूरी दास्तां

तेरे साथ बिताए वो पल मेरी ज़िंदगी के सबसे हसीन पलो में से एक हैं....,सोचता हु क्या हैं जो खिंचता हैं तेरी ओर मुझे ओर हर वक्त एक बैचेनी सी की मानो बिजली सी पूरे बदन में दौड़ती हुई ना जाने कैसी अजीब सी सिहरन लिए वाक़ई बेहद अजीब ...,हा अजीब है... #love #storytelling #story stories
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abhijeetsinghra
abhijeetsinghra Community member
Autoplay OFF   •   2 months ago
अधूरी दास्तां my incomplete love story

अधूरी दास्तां तेरे साथ बिताए वो पल मेरी ज़िंदगी के सबसे हसीन पलो में से एक हैं....,सोचता हु क्या हैं जो खिंचता हैं तेरी ओर मुझे ओर हर वक्त एक बैचेनी सी की मानो बिजली सी पूरे बदन में दौड़ती हुई ना जाने कैसी अजीब सी सिहरन लिए वाक़ई बेहद अजीब ...,हा अजीब हैं..., सालो से साथ हैं मगर बाते हैं की थमने का नाम ही नहीं लेती...और जब भी साथ होता हु एक जाना माना सा एहसास हमेशा साथ होता हैं लगता है हमेशा से मेरे अंदर है मगर मिलता तभी हैं जब तुम मिलती हो ...जानता हु सोच रही हो कैसे लिखता हु तोड़ मरोड़ के ,सीधा सीधा कह कयू नहीं देता की......नहीं नहीं जरूरत नहीं अब इन सबकी ..जो मन हि मन में पा लिया हो अब उसे पाने की क्या कोशिश करु ....खैर छोड़ो तुम भी कितनी अजीब हो आधी नहीं पूरी पागल ..ओर अब बोलू भी तो क्या पागलपन तो तुम्ही से पाया है तभी ये लफ्ज़ रोके नहीं रुकते तुम्हारी तरह बिल्कुल तुम्हारी तरह ., जैसे हवा या क्या कहु पता नहीं ....हा पर बेशक ये पता था तुम भी कहा रुकने वाली थी कबसे जान रहा था हवा भी भला कभी रोके रुकी है किसी के..हा पर कभी ये हवा भी रुक जाया करती थी तुम्हारी ओर मेरी साँसों के करीब जब भी इन्हें पाया है वक्त जैसे थम सा गया हो ...क्या जादू था वो भी...., उस दिन जब इसी हवा को तुम्हारे जरिये महसूस किया ओर वो पहला एहसास मानो आज भी ज़िंदा हैं यही कही ,तुझमे या मझमे ..हा फरक है तो बस इतना की तुम बया करती हो होंठो से ओर में लफ़्ज़ों से बया करता हु ...अब समझ आया की क्यों ऐसे पल मेरे हिस्से में कम हैं..बहूत सोचा ....बहूत पर ये ख्याल आया भी तो कब जब सोचने का ना तो वक्त था ना इरादा तब समझ आया की कम है तभी तो नायाब हैं. अक्सर वहीं पल कीमती होते हैं जो किस्मत से युही मिल जाया करते है किसी नायाब हिरे की तरह ओर फिर मिलने का नाम ही नहीं लेते नायाब हो जाते है जेहेन में ....बहूत रात हो गयी हैं नींद आ नहीं रही तो सोचा कुछ लिख दु ...पर क्या ....जब तक तुम आ गयी तो तुम्हे ही लिख दिया....अरसा हो गया तुम्हे मिले देखे पर अब भी वो याद वो एहसास हर पल साथ है जादू है या शरारत समझ नहीं आता ...पर उसी दिन के इंतज़ार मे लिख रहा हु जब तुम हो साथ और कलम थाम के तुम्हें इस कागज़ पे उतार दु ..खैर सो जाता हु सुबह होने को आयी हैं... सेहत और सूरत दोनो का ध्यान रखता हु जानता हु जिस खूबसूरती से मेरी तरफ देखती हो उसे फीका नहीं करना चाहता....चलो अब ज़्यादा क्या बोलू फिर कभी दिल किया तो आजाऊँगा बया करने ये अधूरी दास्तां..........To be continued..........

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