Vijay Gaira#201 माँ उसकी जिन्दगी में न कोई आराम होता है, हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी माँ को काम होता है।। हम हसते हैं तो वो हंसती है, हम रोते हैं तो वो रोती है, बेटा एक रोटी और खाले, बस यही उसका तकिया कलाम होता है।। हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी माँ को काम होता है।।
Vijay Gaira#201
                                 माँ

उसकी जिन्दगी में न कोई आराम होता है,
हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी माँ को काम होता है।।

हम हसते हैं तो वो हंसती है, हम रोते हैं तो वो रोती है,
बेटा एक रोटी और खाले, बस यही उसका तकिया कलाम होता है।।
... हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी  माँ को काम होता है।। stories
  4
  •  
  0
  •   0 comments
Share

vijaygaira
vijaygaira Community member
Autoplay OFF   •   4 months ago
हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी माँ को काम होता है।।

Vijay Gaira#201 माँ उसकी जिन्दगी में न कोई आराम होता है, हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी माँ को काम होता है।। हम हसते हैं तो वो हंसती है, हम रोते हैं तो वो रोती है, बेटा एक रोटी और खाले, बस यही उसका तकिया कलाम होता है।। हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी माँ को काम होता है।।

कितना भी हो काम वो थकती नहीं है, हम लाख जिद्द कर लें वो अकड़ती नहीं है, पूरे परिवार को खुश रखना, काम उसका सुबह से शाम होता है। हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी माँ को काम होता है।। हमें सम्भालते-सम्भालते अपने आप को खो देती है, थोड़ा गुस्से में हो तो रो देती है, हम सबके चहरे की खुशी, बस यही उसका इनाम होता है।। हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी माँ को काम होता है।।

कैसा भी हो मौसम वो रूकती नहीं हैं, बीमारी के आगे भी वो झुकती नहीं है, हमारी हर एक ख्वाहिश को पूरा करना, उसके लिये फरमान होता है हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी माँ को काम होता है।। हमारे मन की हर बात पड़ लेती है, पापा डांटे तो थोड़ा उन से भी लड़ लेती है, फिर भी उसका हर एक काम हमारी नज़रों में आम होता है, हम फुर्सत से बैठे हों फिर भी माँ को काम होता है।।

Stories We Think You'll Love 💕

Get The App

App Store
COMMENTS (0)
SHOUTOUTS (0)