- पहचान खुद को -
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rahulkashyap
rahulkashyapCommunity member
Autoplay OFF  •  a year ago
This is the hindi poetry about knowing your own potential and how far someone reach.

- पहचान खुद को -

by rahulkashyap

कैसी यह दुनिया है, तू रो कर न यह राग अलाप। बस तू देख जरा, तुझमे कितना दम है, न सोच जरा सा, कि तु कम है।

उठ खड़ा हो और आगे बढ़, अब न, किसी से तू यू डर। कौन है जो रोक तुझे अब सकता है, खुद ही तु है, हार जिससे तू सकता है।

ठंडी पड़ी सी जो आग है, तू आंख उठा कर उसको देख। भीषण तुझमे जो ज्वाल हैं, तू आंख उठा कर उसको देख।

यू ही निकल पड तू राह किसी, ना सोच जरा भी कहा जाएगा। चलता जाए अगर निरन्तर तू, तो शून्य से मिल जाएगा, तू शून्य में मिल जाएगा।

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