क्यों आज मैं आप जैसा ना रहा ना कोई हंसी उमंग ना ही कोई हमसफ़र रहा मासूम सा था ना ही वो मन सा रहा चहकता था जो वो जीवन ना रहा अब तो मैं बस खाली कोई बर्तन सा रहा साए ना अब मैं कम सा रहा सफ़र जीवन का भी लगे कुछ कम सा रहा
क्यों आज मैं 
आप जैसा ना रहा 
ना कोई हंसी उमंग 
ना ही कोई हमसफ़र रहा 
मासूम सा था   
ना  ही वो मन सा रहा
चहकता था जो
वो जीवन ना रहा
अब तो मैं बस
खाली कोई बर्तन सा रहा
साए ना अब मैं
कम सा रहा
सफ़र जीवन का भी 
लगे कुछ कम सा रहा




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rahulbeniwal
rahulbeniwal Community member
Autoplay OFF   •   18 days ago
कविता

क्यों आज मैं आप जैसा ना रहा ना कोई हंसी उमंग ना ही कोई हमसफ़र रहा मासूम सा था ना ही वो मन सा रहा चहकता था जो वो जीवन ना रहा अब तो मैं बस खाली कोई बर्तन सा रहा साए ना अब मैं कम सा रहा सफ़र जीवन का भी लगे कुछ कम सा रहा

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